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पहली सफलता | Pahli Safalta

डर, मानव जीवन का महत्वपूर्ण शब्द , हर किसी को यह शब्द विभिन्न तरीकों द्वारा अपनी उपस्थिति से अवगत कराता है, बचपन मे मुझे पानी मे डूब जाने का डर सबसे ज्यादा सताता था, कई बार यह ना सो पाने का कारण बन जाता, अपने गांव के तालाब और नहर में अपने दोस्तों को नहाते हुए करतब करते देखना बहुत अच्छा लगता लेकिन मैं सिर्फ सुरक्षित इलाके तक ही डुबकी लगा पाता , जिस प्रकार पंछी आनंदित और स्वछंद आकाश में उड़ते हैं ठीक वैसा ही पानी मे तैरने को मेरा मन व्याकुल हो जाता, लेकिन डरने की वजह से यह मुमकिन नही हो पा रहा था,
पूर्व माध्यमिक शाला के उपरांत यह डर और बढ़ने लगा, कभी कभी मन में विचार आता की अगर किसी ने मुझे गहरे पानी में धक्का दे दिया तो ? या फिर जब मै किसी नाव पर बैठ नदी पार करने जाऊँगा और अचानक वह नाव डूबने लगे तब ? समझ नही आता था कि कैसे इस डर से मुक्ति मिले, एक दिन टी. वी. पर तैरने का तरीका सिखाया जा रहा था मैंने भी कुछ शुरूआती प्रयासों को याद रख लिया और अपने डर का सामना करने की ठानी,
स्कूल से भाग भागकर रोज दोपहर को मैं तालाब पहुंच जाता और तैरने का अभ्यास करता, उस ज़माने में इंटरनेट और केबल टी. वी. जैसे आसान मनोरंजन के साधन मेरे पास नही थे, पूरा वक्त दोस्तों के साथ खेलने या खेतों की ओर जंगलो में भटकने में बीत जाता, साथ ही पूरे मनोयोग से तैराकी का अभ्यास जारी रहा, इस दौरान मै कई बार निराश भी हुआ मगर मेरा प्रयास जारी रहा, कई बार तो अम्मा ने नहर में नहाते हुए भी पकड़ लिया और सारे कपड़े लेकर वो घर आ गई, भागने का कोई मौका नहीं मिला, मज़बूरी में मुझे नंगा ही घर आना पड़ा मोहल्ले में बेइज्जती हुई सो हुई मार पड़ी वो अलग,
आखिरकार एक दिन गर्मियों की छुट्टियों में भरी दोपहरी में अपने दोस्तों के साथ तैरना सीख लिया, ये मेरी ज़िंदगी की पहली उपलब्धी थी जो मैंने अपनी मेहनत और लगन से पाई थी, जितनी खुशी मुझे हुई उससे कहीं ज्यादा आनंदित मेरी मित्र मंडली थी , उन लोगों ने बहुत शोर मचाया और तालाब के उस पार जाने का मन बनाया, अदम्य साहस और हिम्मत के साथ मैं भी चल पड़ा तालाब पार करने, मुझे विश्वास था कि अगर कुछ संकट पैदा हुआ तो मेरे दोस्त मुझे बचा लेंगे, और वो सच मे तैयार भी थे, पहले ही प्रयास में मैंने वह तालाब पार कर लिया,
पानी में पहली बार तैरना बिलकुल वैसा ही अनुभव है जैसे हवा में उड़ना, उस पल की ख़ुशी शब्दों में बयान नहीं की जा सकती, ये था मेरा पहला अवार्ड , ज़िन्दगी के द्वारा ।।। 

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