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मेरी किताब के साइड इफेक्ट | Meri kitaab ke side effect

मानव कई प्रकार से अपना जीवन धन्य कर सकता है, कई बेहद आसान उपाय हैं मुक्ति पाने के लिए, और मेरी किताब , three legend with one angel ,,, पढ़कर बड़ी आसानी से आप मोक्ष प्राप्त कर सकते है, दुनिया में कई लोग ऐसे हैं जिनकी ज़िंदगी ख़ुशी ख़ुशी कट रही होती है तो उन्हें मजा नहीं आता और ऐसा लगने लगता है की "आज कुछ तूफानी करते हैं. ऐसे ही एक दिन हमारे एक परिचित अंकल को पता नही क्या सुझा वे इस किताब को बाजार से खरीद कर ले आये और बड़े मनोयोग से पढ़ने लगे, पता नहीं उनकी ग्रहदशा अच्छी थी की नहीं फिर भी उन्होंने इस किताब को पढने का जोखिम उठा लिया . मेरा मानना है की मेरी किताब को पढने से पहले कम से कम किसी अच्छे से ज्योतिषी से विमर्श कर लेना चाहिए
किताब पढने के दौरान उनका स्वभाव बदलने लगा, मेरी किताब पढ़ते पढ़ते वो अपने बाल नोचने लगे, धीरे धीरे उन्हें गुस्सा आने लगा दांत पीसने लगे, दिल की धड़कन बढ़ गई साथ ही उनके अन्दर का सोया हुआ शैतान जागने लगा और दैवयोग से उन्हें दिल का दौरा पड़ गया, और इतना गहरा सदमा लगा कि उन्होंने बिस्तर पकड़ लिया , मानसिक स्थिति इतनी गंभीर हो गई की हर समय दांत पीसते हुए वो इस किताब के लेखक को जी भर कर कूटने का सपना ही देखने लगे,
उनकी आत्मा तड़प रही थी हाय ! ये मैंने क्यों पढ़ डाला , ये कोई कहानी है ? इसमे मुझे तो कोई लीजेंड नजर नही आया , और एक भूतनी को जबरन एंजेल बताया जा रहा है, लेखक पूरी तरह से गजनी जैसा मेन्टल है, जब चाहे किसी भी किरदार को गायब कर देता है और जब चाहे दोबारा जिंदा . अक्सर वो इस किताब को याद करके चीखने लगते और पागलपन के दौरे भी पड़ने लगे, डॉक्टर ने जब उनके घरवालों से पूछा कि इन्होंने कितने पन्ने पढ़े होंगे ?, तब उनके सुपुत्र ने बताया कि डॉक्टर साहब पूरा पढ़ लिया, ये सुनकर डाक्टर साहब चौंक गए, और बोले "बेटा ऊपर वाले से दुआ करो, बस उन्ही का भरोसा है .
कई बार तो डाक्टर ने उन्हें किसी पागल खाने में भर्ती करने की बात भी की, मगर उसके सुपुत्र ने मना कर दिया, लेकिन वो भी अन्दर ही अन्दर इसके लेखक को उल्टा लटकाकर, आड़े तिरछे एंगल से पीटने के लिए व्याकुल था, इसी लिए मेरी किताब को पढने से पहले विशेषज्ञ की राय जरुर लें, हो सके तो अपनी वसीयत किसी अच्छे से वकील के पास जरुर लिखवा लें, और कम से कम एक बार गंगा स्नान जरुर कर आयें तभी मेरी पवित्र किताब को पढ़ें.

एक दिन मेरे दो मित्र जब उन्हें देखने उनके घर पहुंचे तो अंकल जी उन्ही पर भड़ास निकालने लगे, उनमे से एक को लेखक समझ कर टूट पड़े , और उसपर झपट कर उसका गला दबाने लगे, बड़ी मुश्किल से उस भलेमानुस को बचाया गया .
और उनका सुपुत्र उन्हें शांत कराते हुए बोला --- हे पिता श्री, हे अपार धैर्यसागर ! आप शांत हो जाओ, मैं उसको ले के आऊंगा ,,, गहराई से सोचते हुए और अपने दांत पीसते हुए फिर कहा --- "मैं उस लेखक को जरूर यहां लेकर आऊंगा पापा , ये मेरी प्रतिज्ञा है उस लेखक को पकड़ कर रस्सियों से जकड़कर शीघ्र ही आपके चरणों में अर्पित करूंगा .
फिलहाल लेखक महोदय अज्ञातवास में हैं ।।।

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