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मानव जीवन में ईर्ष्या और जलन का महत्त्व | Manav jeevan mein irshya ka mahatva

आमतौर पर बड़ी सहजता से हर कोई यह कह देता है कि "मुझे किसी से जलन नहीं होती या मै नहीं जलता किसी से ।
।। सच में ।। अब इस बात पर गौर कीजिए -
आप बेरोजगार हैं और किसी दोस्त से मिलने गए, सबसे पहले उसके घरवालों की शक्ल गौर से देखिये और सोचिये इस वक्त वो आपके बारे में क्या सोच रहे हैं , "लो आ गया कामचोर" मेरे बेटे को बिगाड़ना बंद कर नासपीटे ! कब सुधरेगा तू" फिर भी आप उन्हें अपनी दांत जरूर दिखाएँगे, वे भी मजबूरी में आपको अपने दांत दिखाकर अन्दर आने को कहेंगे, हालांकि उनका मन तो कर रहा है की आपको भगा दें लेकिन क्या करें उनकी भी मजबूरी है.
अब अपने दोस्त से मिलिए, आजकल वो कितना व्यस्त है उसका कारण और उसके ऑफिस की उपलब्धियां सुनिये, फिर वो आपको मिठाई जरूर खिलायेगा क्योकि उसका अभी अभी प्रमोशन हुआ है, आप फिर मुस्कुराइये, मुस्कुराते रहिये और, ये मुस्कान वास्तविक लगनी चाहिए, आपको तो बिलकुल भी जलन नहीं हो रहा है, वाह क्या बात है आप तो सिद्ध पुरुष हैं .

फिर उसकी सुन्दर, सुशील बीवी आपके लिए दुखी मन से चाय बनाकर लाएगी, क्या करें मजबूरी है . पतिदेव के निकम्मे दोस्त को कुछ तो खिलाना पिलाना होगा ना ? और चाय सबसे सस्ता पड़ता है . वैसे अब तक आपकी शादी भी हो चुकी होती लेकिन आपका दुर्भाग्य की आप बेरोजगार हैं, फिर अचानक कहीं से उसका गन्दा सा बच्चा आपकी गोदी में धड़ाम से आ बैठेगा, चॉकलेट से सने अपने हाथ आपकी शर्ट में पोंछकर आपसे मोबाईल जरूर मांगेगा, "अंकल - "अंकल ! मोबाईल दो न गेम खेलूंगा, आपका मन तो करेगा की इस गधे के बच्चे को उठा के पटक दूँ,या खिड़की से बाहर फेंक दूँ .

मगर आप ऐसा नहीं कर सकते मजबूरन आप कहेंगे - "वाह कितना मासूम बच्चा है बिलकुल अपने बाप पर गया है, (हरकतें भी बंदरों वाली है ) तभी उसकी बीवी अपने बच्चे और अपने सुखी गृहस्थ जीवन की कहानियां सुनाना शुरू कर देगी. आप चाहे या ना चाहें, और आपको पुरे ध्यान से उसे झेलना ही होगा साथ ही ओह वॉव , सच में , इस तरह के आश्चर्य मिश्रित शब्दों के साथ प्रतिक्रिया भी देनी होगी, फिर वो आपको पिछले महीने की खंडाला ट्रिप वाली सड़ी हुई फोटो अल्बम जरूर दिखाएगी, यहां भी आप भरपूर तारीफ़ करेंगे, और आपके चेहरे पर मुस्कान और अलग अलग भाव के साथ आपको हर तस्वीर में अलग अलग टिप्पणी करनी है.

इसके बाद आपके दोस्त का पूरा परिवार अपने खानदान की कहानी बताएँगे की इनके यहाँ दूर-दूर तक कोई भी बेरोजगार नहीं है, सब पैदा होते ही नौकरी में लग जाते हैं, माने इनके खानदान की परम्परा यही हो, और एक मै हूँ निकम्मा, कामचोर ! इस अपराधबोध को महसूस करिए, फिर भी आपको जलन नहीं होगी, क्योंकि आप एलियन हैं इस गृह के थोड़ी न हैं.

ये सब झेलकर घर पहुचने पर ये सारी बातें अपने घरवालों को बताइये फिर अब उनकी प्रतिक्रिया देखें - "तू कब उसके जैसा कमायेगा ? नालायक ! तेरी शादी हो गई होती तो आज तू भी दो तीन बच्चों का बाप होता, जाके कुछ काम धाम क्यों नहीं करता ?
और आप कहते हैं आपको जलन नहीं होता ।
असल में मानव नामक जीव दूसरे को दुःख और तकलीफ में फंसा देखकर महासन्तोष का अनुभव करता है, किसी बेरोजगार और निकम्मे इंसान को देखकर अपनापन महसूस होता है ,
समस्त भारतीय बेरोजगार भाइयों को समर्पित यह रचना .

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