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लम्बे बालों वाला लड़का | Lambe baalon waala Ladka

किस्मत खराब कहें, या विधि का विधान, छात्रावास में रहना पवन को कभी भी रास नहीं आया, चाहे वो स्नातक के दौरान हो या स्नातकोत्तर के समय, हर बार कमरे में साथियों के साथ उसकी लड़ाई हो ही जाती थी, या तो वहां का खाना उसे पसंद न आता, उसका गुस्सैल स्वभाव हर बार उसे किसी न किसी झगडे या झंझट में फंसा देता, इस बार उसने ठान लिया था की भले ही मार खा लूँगा, पर लड़ूंगा किसी से नहीं, क्योंकि घरवाले भी तंग आकर उसे आख़िरी चेतावनी दे चुके थे, और अब तो उसे सतना का अपना घर छोड़कर भोपाल में रहना है, यहाँ रहकर उसे एम. फिल. के लिए तैयारी करनी है,
इतिहास विषय का होनहार छात्र, पवन, हबीबगंज भोपाल में किराए के एक कमरे में रहने आया, किराया ज्यादा होने की वजह से चार लोगों ने उस कमरे में निर्वहन करने का फैसला लिया था, बाकी के तीन लड़के उसी के शहर सतना से हैं, उसे यह संगती जम गई क्योकि तीनो विद्यार्थी उससे उम्र में छोटे और सभी भैया कहकर संबोधित करते हैं, उसे और क्या चाहिए था, थोड़ा सम्मान और मन की शांति,
पवन को यह आख़िरी अवसर घरवालों ने दिया था, साथ ही सख्त हिदायत थी की अब अगर तुम्हारी कोई शिकायत आयेगी तो तुम्हारी कोई भी सहायता नहीं करेगा, न ही तुमसे कोई सम्बन्ध रखेगा, इसलिए पवन यहाँ रहते हुए अपने काम से काम रखने लगा साथ ही आत्म मंथन करते हुए उसने जाना की अगर मै सदैव शांत रहूँ तब ही सब ठीक रहेगा, उसने प्रण लिया की वह कम से कम बात करेगा और पढ़ाई पर ही पूरा ध्यान देगा. उसकी सबसे बड़ी परेशानी यही थी की वह किसी की सुन नहीं सकता, कोई अगर किसी विषय में गलत कहे तो पवन उसे सुधारने के प्रयास में टिप्पणी कर देता, फ़ालतू की बहस शुरू कर देता और नतीजा - लड़ाई हो जाती, उसे सिर्फ बोलना पसंद है .

यहाँ किराए के कमरे में चारों लड़के मिलकर अपना खाना खुद बनाया करते, और मिल जुल कर सारे काम किया करते. सभी लोग सुबह सुबह नाश्ता करके कॉलेज निकल जाते, और शाम तक लौट आते, साथ में कभी राशन और भाजी तरकारी लेने चले जाते, यही दिनचर्या थी, पवन अक्सर घर में ही रुक जाता और अपना शोध कार्य करते पाया जाता, उसे इसके आगे डॉक्टरेट की उपाधि भी तो हासिल करनी है, इस दौरान उसने योग करना शुरू किया, और जितना हो सके मौन रहकर चिंतन करने लगा, इससे उसकी सहन शक्ति बढ़ने लगी, और वह लोगों को अधिक देर तक सुनने लायक बन गया, धीरे-धीरे चारों लड़के घुल मिल गए और सब चीजें मिल-जुल कर संचालन करने लगे,

आज निलेश का जन्मदिन है, इसलिए आज सबने स्वघोषित छुट्टी ले ली, अब तो दिनभर कमरे में हंगामा हुआ और शाम को पवन भैया ने बोतल खोल दी, वो कभी कभी पी लेता हैं, लेकिन अकेले , उसूल का पक्का इंसान अपने छोटे भाई तुल्य लड़कों को उसने पूछा भी नहीं की “तुम लोग भी पियोगे क्या? वे लोग भी भैया की आदत जानते हैं, अब निलेश, थोड़ा खुश होते हुए पवन के पाँव के पास बैठ गया, पवन रसोई घर में कुर्सी लगा कर बैठा है, उसके सामने नशे की दूकान टेबल पर सजी है, और निलेश उसके पाँव के पास बैठकर बोला - “भैया आपको कितने दिन हो गया पीते हुए ?
“कुछ साल हुए होंगे, लेकिन मै रोज नहीं पीता, महीने दो महीने में एकाध बार, बस. उसने गिलास टेबल पर रखते हुए कहा,

“वाह भैया सही है, ऐसे ही पीना चाहिए कुछ लोग तो, रोज का धंधा बना लेते हैं, और मोहल्ले में गली गलौच करना अलग बात, घरवालों को भी इससे खूब परेशानी होती है, लेकिन ये बात कोई बेवडा समझता थोड़े न है, लेकिन आपको मान गए भैया , आपसे बात करके लग ही नहीं रहा की आप इतना पी चुके हो और कोई नहीं कह सकता की आपने पी रखी है,
मोहन दुबे भी वहीँ आकर बैठ गया, इस कमरे में यही एक प्राणी है, जो की चुप नहीं बैठ सकता, इतना पटर-पटर करता है की, इस कमरे के निवासियों ने इसका नाम “सर दर्द दुबे” भी रखा है, इसके आने की ही कमी थी, उसके बाद इसने अपने मोहल्ले, परिवार और पहचान वालों के पीने की क्षमता और उनके किये करम काण्ड की कथा शुरू कर दी, पवन उन दोनों बोलने वाले मिटठूओं की बकवास सुने जा रहा है,

वह अगर बदला हुआ न होता तो इन दोनों का चीरहरण होना तय था, क्योकि सिर्फ पवन बोलता है, और जनता सुनती है. ऐसा वह हमेशा बोला करता था, सतना का मेधावी गुंडा पवन उसके नाम से ज्ञानियों का ज्ञान सूख जाया करता था, लेकिन किस्मत की मार देखो, अक्सर ज्यादा बोलने की वजह से ही कोई भी उस से चिढ़ जाता था, और ऐसा नहीं है की हर बार वह किसी को पीटकर आये, कई बार वह भी बुरी तरीके से फंस जाता था या तो मार खाकर घर आता, मगर पिछली बार जिसको उसने पीट दिया था, वह परिवहन मंत्री का दूर का रिश्तेदार निकला, उसके पिताजी ने बड़ी मुश्किल से उसे जेल जाने से बचाया था, इसी लिए तो वह चाहकर भी किसी को पीट नहीं सकता था,

मगर इस कमरे में वह उनकी बातें वह बड़े प्रेम से सुनता रहा, उसने लम्बी सांस ली और मुस्कान के साथ पैर लम्बे कर दिए, मानो वह आज तैयार बैठा है, की बोलो कितना बोलना है, मै तुम्हे नहीं रोकूंगा, तुम लोग खुद थककर नमस्ते कहोगे तभी मै उठूँगा, उसका गिलास फिर से भरा निलेश ने, और उसे टेबल में रखकर, अपने पायजामे में हाथ पोंछकर उसने नमकीन लिया और खाने लगा, मोहन अब नमकीन के स्तर पर टिप्पणी देने लगा, लेकिन निलेश भी उसी राग में डूबा हुआ, अपना बोलना भी नहीं बन्द कर रहा था, “पता है भैया मेरे दादाजी के गाँव में लोग घर में शराब बनाते हैं, आप चलना तो वहां की शराब चखाऊंगा, आपको बहुत पसंद आएगा, वहां का खाना पीना वहां की परम्परा और सांस्कृतिक गतिविधियाँ देखकर आपको बड़ा, अच्छा लगेगा, पवन सिगरेट का धुंआ उड़ाते हुए बस अपना सर हिला दिया,

तभी उस कमरे का चौंथा प्राणी अविनाश चिल्लाया – चलो आ जाओ, भाइयों, खाना आ गया है, सोहन ढाबे से गरमा गरम खाना आ गया है, आकर खा लो फिर रात भर गोष्ठी करते रहना, मै बहुत थक चूका हूँ, खाकर सीधे लेट जाऊँगा, उन लोगों ने वार्तालाप रोककर रात का खाना खाया, और देर रात तक बातें हुई,
निलेश और मोहन दोनों में कुछ ख़ास नहीं जमती है, वे दोनों अक्सर लड़ते रहते, लेकिन अलग भी नहीं होते थे, एक दुसरे की जितनी मदद करते थे, उतना लड़ते भी थे, निलेश के बाल बहुत लम्बे थे, जिसे वह महंगे शेम्पू और अन्य कई प्रसाधनों का उपयोग करके, अपने बालों की शोभा बढाया करता. जबकि मोहन हट्टा-कट्टा था, और वह भी सुन्दर नौजवान है, लेकिन उसका सबसे ज्यादा ध्यान अपने मोबाइल और लैपटॉप पर रहता,

कई बार जब उसका लैपटॉप ठीक से काम नहीं करता तो वह सिर्फ पवन को तंग करता, और उसको बहुत तंग करके रख देता, “भैया देखो न इसे, मेरा काम अटक गया है, जबकि वह सारा दिन सिर्फ फिल्मे ही देखा करता था, इस कारण पवन भी चिल्लाता “बस कर दुबे. कितना सर खायेगा, शांत होजा,,,,, सर दर्द दुबे.....
लेकिन कुछ भी कहो दोनों ही लड़के, बड़े अच्छे और आदत भी अच्छी, कोई नशा नहीं करते थे, कई बार पवन के खाते में पैसे नहीं होते तो, वे पवन को रूम के किराए से लेकर राशन तक के लिए कुछ नहीं बोलते थे, ऐसा तो होता ही रहता है, लेकिन वे लोग पवन को सच में अपने बड़े भाई की तरह मानने लगे और पवन भी उन्हें छोटे भाइयों की तरह मानने लगा,
अविनाश बाकी के तीन लड़कों से श्रेष्ठ है, वह किसी को अपशब्द नहीं कहता, और रास्ते में, कोई घायल जानवर अथवा जरूरतमंद इंसान मिल जाता तो वह बिना संकोच मदद कर दिया करता, सबको प्रेम से जय श्री राम कहकर अभिवादन करने वाला लड़का,
इनके पड़ोस की महिलाएं भी समय समय पर उन्हें घर पर बनने वाले व्यंजन थाली में भरकर जरुर देती, ताकि इन्हें इस बिल्डिंग में घरवालों की कमी महसूस न हो. वे लोग कृतज्ञता पूर्वक आस-पास के महिलाओं को सम्मान देते, और उनको किसी भी कार्य में मदद करने से हिचकते नहीं हैं,
इस दौरान पवन ने अपने अन्दर एक महान बदलाव देखा, उसे अब गुस्सा नहीं आता, उसका रक्तचाप सामान्य रहता है, बात बात पर उबलने नहीं लगता, उसको धीरे धीरे अपनी गलती का अहसास होने लगा, खासकर निलेश और मोहन को देर तक सुनने और समझने से अपनी गलतियों का पूर्ण अहसास हुआ, उन दोनों लड़कों की हरकत बिलकुल उसी के जैसे ही है, बस वे लोग तोड़ फोड़ नहीं किया करते, वह पहले बिना सांस लिया बोलता ही रहता था, सिर्फ अपनी बात और अपने काम से काम, दूसरों को तो वह मुंह खोलने ही नहीं दिया करता था, किसी की भी बेइज्जती कर दिया करता था, जिससे कोई भी उससे चिढ जाया करता, और कोई ज्यादा कुछ बोले तो वहीँ पर मार पीट शुरू. इसी लिए उसकी किसी दोस्त से भी नहीं पटती थी, लेकिन अब वह ऐसा नहीं रहा,
सबको वह सुनता और सम्मान देकर बातें करता, इससे यह हुआ की अब उसे पहले की तुलना मे ज्यादा सम्मान मिलने लगा, घरवाले भी उसकी गंभीरता से बहुत प्रभावित हुए, और समझ गए की लड़के की अक्ल की दाढ़ उग आई,
ये सब हुआ, सिर्फ निलेश की वजह से, जिसे वह लम्बे बालों वाला लड़का कहता है, उसी की बातें सुन सुनकर उसे आत्म परिचय हुआ, उसने जाना की कम बोलने से कितना लाभ होता है, आज वह अपनी दुनिया में ख़ुशी-ख़ुशी जी रहा है, और इसका पूरा श्रेय जाता है – लम्बे बालों वाले लड़के को ...

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