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क्या अन्धविश्वास हूँ मै | kya main andhwishvasi hoon

सदियों से धोती पहना, तिलक लगाकर बगल में झोला दबाये,
अपने कर्तव्यों का निर्वहन करने वाला बटुकवट सावित्री हलषष्ठी माता का वंदन गाता दास हूँ मैं,

राधेकृष्ण की प्यारी लीलाश्री राम का धीरज और संस्कार हूँ मैदुनिया को ज्ञान सत्यमार्ग बताने वाला व्यास , हाँ अन्धविश्वास हूँ मै ।

गणपति जी की प्रथम वंदनारावण का श्राद्ध कराने वाला क्षत्रिय, अपने राष्ट्रकुल का गौरव बढ़ाने वाला देश का परम दुर्लभ इतिहासअन्धविश्वास हूँ मै ।

देश और समाज बदलाबदल गए इतिहासकार, हर तकलीफ के साथकभी न बदल कर उपनिषदों को स्मरण करता हुआवेदों का ह्रदय में सहेजने वालापुराणों में रमने वाला विज्ञान हूँ मै, क्या सिर्फ अन्धविश्वास हूँ मै ।

क्या जरूरत थी धोती बचाने की, क्या जरुरत है तिलक लगाकर विचित्र दिखूं ? या अपनी शिखा की लम्बाई रोक ना पाऊं, क्यों मै दूसरों की शादी करवाता हूँ ? शुभ-अशुभ घड़ियों में निमंत्रित होकर क्यों मै अपमानित होकर जीता हूँ ? महान परशुराम का वंशज, क्या सिर्फ अंधविश्वास हूँ मै ।

लांछन लगाया जाता है, कभी मुझको शास्त्र सिखाया जाता है, कभी समाज मेरी गलतियों को खोजते हुए पाया जाता है, क्यों युवा वर्ग को मोह नहीं क्यों कर्मकांड से दुःख लगता है आचार्य प्रणाली से भय क्या ? क्यों हवन पूजन जल्द निपटाया जाता है ?

विश्व गुरु था कभी, कभी सम्मानित पद पर शोभा पाता था, आज सिर्फ एक याचक, भेदभाव का सृजनकर्ता जात - पात का जनक, समाज की नजरों में क्या सिर्फ अन्धविश्वास हूँ मै।

मेरे धरम करम अब किस काम के ? यज्ञ हवन अब मिथ्या है, ढकोसलों को ढोता हुआ मेरे श्री राम का अस्तित्वजीवित सनातन मार्ग हूँ मै ।

जन्मोत्सव से अंतिम संस्कार कराने वाला सामाजिक आधार हूँ मै, धन पद साधन मोह बिना, भिक्षा लेकर चूल्हा जलाने वाला याचक, समाज से ठुकराया हुआ गरीब सुदामा का कठोर विश्वास हूँ मै ।

हर युग में परमात्मा की प्रतिध्वनीश्री हरी का गुणगान हूँ मै, समाज के हर उत्सव विधिवत संपन्न कराने वालाकिसी को अपना दुश्मन ना मानकर सबकी मंगल कामना करने वाला वसुधैब कुटुम्बकम” को जीवित रखता सर्वे भवन्तु सुखिनः वाक्य हूँ मै ।

क्या सिर्फ एक अंधविश्वास हूँ मै ? समाज का भला चाहना क्या गलती है मेरी ?सही रास्ता दिखाकर सबकोसदियों से सांस्कृतिक धरोहर सहेजने वाला

अपने ही समाज में , ना समझा ना जानाउपेक्षित अलंकार हूँ मैक्या सिर्फ अंधविश्वास हूँ मै ?
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मनोज वेदप्रकाश पाण्डेय ...

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