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इस देश की शिक्षा पद्धति :| Is desh ki siksha padhati | Education system of this Country

इस देश की शिक्षा पद्धति :
जहां हमे दीवार में लिखना पड़ता है , यहां मत थूको , यहां पर लघुशंका ना करें , उसके बाद भी आपेक्षित परिणाम नही मिलते , यहां आज भी पैसा निकालने बैंक में दूसरे से फार्म भरवाया जाता है , लाइसेंस बनवाने पासपोर्ट बनवाने या अन्य आवेदन दूसरों से भरवाया जाता है , यहां का एम ए पास लड़का भी कई बार लोकल टिकिट के साथ सुपरफास्ट ट्रैन में टी.टी. द्वारा पकड़ा जाता है , गलती करने पर हमसे पूछना तो चाहिए था ना ऐसा कहकर डांटा जाता है , डिग्री यहांपर सिर्फ नौकरी पाने का जरिया है , असल जिंदगी में स्कूल और कॉलेज की पढ़ाई काम नही आती , पड़ोसी द्वारा उपयोग किया जाने वाला साबुन , हमारे घर मे भी लाया जाता है , चार लोगों से पूछकर ही गाड़ी खरीदी जाती है , हम उस देश के वासी हैं जहां टी.वी. यह निर्णय करता है कि हम क्या खाएं कौन सा मंजन घिसें , पूर्णतः गुलाम मानसिकता से युक्त , ऐसा देश है मेरा , विदेशी चीजों के दीवानों देश , सड़े हुए चेहरों को घटिया कहानी के साथ तीन सौ करोड़ कमा के देने वाले लोग , अगर चेहरा विशेष ना हो तो शानदार कहानी वाली फिल्मों को फ्लॉप बना देने वाले लोगों का अतुल्य देश ,
आजादी के सत्तर साल बाद भी इस देश की जनता को जातिवाद पर उकसाना आसान है, यहां लोग अपना दिमाग कम उपयोग करते हैं और दूसरों की बात फौरन मान लेते है, यहां हर कोई किसी न किसी का अनुयायी जरूर है, हर कोई अपने राज्य अपना जिला और अपने जातिवालों की चिंता पहले करता है, हमारी शिक्षा पद्धति न तो हमे आत्मज्ञानी बना पाने में सक्षम है ना ही हमारा गौरवशाली इतिहास पढ़ाया जाता है, हम आज भी अधिकांश आवेदन पत्र पड़ोसी से भरवाते हैं , और पढ़ा लिखा बेरोजगार अपने इलाको में मोबाइल सेटिंग और अलार्म भरने का समाज सेवा अवश्य करता है ।। अधिकांश लोगों को कानून नही पता। ट्रैन में अगर खराब समोसे मिलते हैं तो ये नही पता किससे शिकायत करें , कई लोगों को पता नही होता कि लोकल की टिकट लेकर सुपरफास्ट ट्रैन में चढ़ना मना है, जिसे अंग्रेजी नही आती या सरकारी स्कूल में पढ़ता हो वह समाज मे निम्न श्रेणी का माना जाता है, हमारी शिक्षा पद्धति असल जीवन मे कोई काम नही आती, । नियम तो बनते रहते हैं, तोड़ने वाले हैं सदा के लिए ।।

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