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एक सवाल | Ek sawal

एक वर्ष पूर्व , मै श्री जगन्नाथ ,पुरीधाम , के यात्रा पर गया था , वहां से कोणार्क मदिर जाने का भी सौभाग्य प्राप्त हुआ, वहां की भव्य और महानतम मंदिर देखकर आत्मा तृप्त हुई , ऐसी अद्भुत और गौरवशाली भारतीय स्थापत्य कला का महान रूप देखकर अत्यंत गर्व होता है,

इस मंदिर में कई नग्न मूर्तियां एवं कामक्रीड़ा रत कई कलाकृतियां बनी हुई है , जिसे देखकर मन में सवाल जरूर उठता है की ऐसा क्यों बनाया जाता है, ऐसा क्योँ होता है कई मंदिरों में ? 
यह जिज्ञासा मेरे मन में कई दिनों से थी परन्तु कोई समाधान नहीं मिला था, कई बार तो यह व्यर्थ और अश्लील प्रतीत होता था ,

वहां के एक स्थानीय गाइड ने हमें इस मंदिर की विशेषता और ऐतिहासिक महत्त्व का वर्णन बड़ी ही बारीकी के साथ, एक एक बात को समझाते हुए किया, आज हमारे साथ एक ज्ञानी और जानकार गाइड साथ में था, उसने बड़ी सूक्ष्मता से इस बात का वर्णन किया -

"जिस समय इस मंदिर का निर्माण हुआ उस वक्त इस राज्य में बहुत बड़ा संकट छाया हुआ था , धन की कमी नहीं थी राजकोष भरा हुआ था परन्तु सैनिको की संख्या अत्यंत कम थी, आये दिन युद्ध होता रहता था, सीमा पर सदैव विदेशी आक्रमण का खतरा बना रहता,और पड़ोसी आक्रमण की वजह से अधिकाँश सैनिक मारे जा चुके थे, लगातार सैनिकों की संख्या का घटना देश के लिए घोर चिंता का विषय था, उस समय पुरुषों की तुलना में स्त्रियों की संख्या कई गुना थी, अर्थात लिंगानुपात का संतुलन बिगड़ा हुआ था,

वह समय था वैराग्य और ज्ञान अर्जन का । लोग परमात्मा प्राप्ति हेतु सदैव प्रयत्नशील रहते थे, और, अक्सर सांसारिक जीवन त्यागकर सन्यासी बन जाते थे, अब ऐसा ही चलता रहा तो सैनिकों की संख्या में वृद्धि कैसे हो ? अधिकाँश राज्य ऐसी परेशानियों में घिरे हुए थे, और, कैसे सैनिकों की संख्या में वृद्धि हो - बस यही चिंता सभी को थी,

तो जान बुझकर मंदिर के चारों तरफ ऐसी मूर्तियां बनाई गई जो युवाओं को प्रेरित करें विवाह करने हेतु, इन कलाकृतियों के माध्यम से उनको विवाह हेतु प्रेरणा मिले, काम की लालसा उत्पन्न हो, और, संतानोत्पत्ति करें ताकि पुरुष सैनिकों की संख्या में वृद्धि हो, जिससे राज्य की सीमा सुरक्षा भलीभांति हो सके ,

इसी वजह से हमारे देश में बहु विवाह का भी प्रचलन होने लगा, इसी लिए ही पुरुष कई स्त्रियों से विवाह कर सकता था, और एक साथ कई पत्नियों के द्वारा वह अपने अपने बच्चों की संख्या बढ़ाकर देश में सैनिकों की संख्या बढ़ा सकता था, इसीलिए शायद बहुपत्नी प्रथा का चलन बढ़ा होगा,

हर बात के पीछे कुछ न कुछ कारण अवश्य होता है। खासकर अगर हम भारतीय संस्कृति और परंपरा की बात करें तो, हो सकता है मेरे शब्द सिर्फ एक पहलु ही दर्शा रहे हों, या हो सकता है की कई और भी कारण रहा होगा इन कलाकृतियों को बनाने के लिए, लेकिन स्थानीय गाइड के द्वारा कहे गए हर शब्द में मुझे सिर्फ सच्चाई ही नजर आई, इसी लिए यह लेख लिखने का मन हुआ, जो सिर्फ मेरे मानसिकता का प्रस्तुतीकरण मात्र है,

हमारे देश और संस्कार इतने महान हैं की हर बात को कोई न कोई कारण अवश्य है, चाहे वो कोई काव्य रचना हो या कलाकृति, कृपया अपने देश और सभ्यता का भलीभांति अध्ययन करें, और प्रयास करें की हम हमारी जिज्ञासा का समाधान हो, पूरी बात समझ कर ही अपनी सभ्यता और संस्कृति पर सवाल उठाना चाहिए ,

वन्दे भारतम ।..............................

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