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युवराज की यात्राएं - 2 | Yuvraj ki yatraen -2

कालेज से लौटकर जैसे ही घर पहुंचा, तो देखा घर के बाहर सफ़ेद रंग की स्विफ्ट खड़े थी, नंबर भी जाना पहचाना मतलब ये मेरे ताऊ जी की कार है, दुनिया में एक यही इंसान है जिससे मै नफरत करता हूँ, मैंने फ़ौरन अपनी बाइक घुमा दी और चौबे कालोनी की तरफ भागा, अब तो अनीता के घर ही जाकर पड़ा रहूंगा जब तक की ताऊ निकल न ले.
अनीता के घर पहुंचा तो देखा - माँ बेटी दोनों सोफे पर बैठे सास बहु की नौटंकी वाले सीरियल देख रही थी, मुझे तो लगता है आंटी अपनी बेटी को ऐसे सीरियल दिखा-दिखा कर ट्रेनिंग देते रहती है, की सास का जीना कैसे हराम करना है, और मेरे पहुँचते ही आंटी ने घूरकर देखा, फिर भी उन्ही के पास सोफे पर बैठ गया और उनके पैर छूटे हुए कहा “पाय लागूं आंटी जी, उन्होंने घूरते हुए ही कहा “कुछ भी कर ले तू इस घर का दामाद नहीं बन सकता, अनीता और मै हंस दिए .
इसके बाद यहीं नाश्ता करके मै भी सास बहु के दुखड़े देखने लगा, अनीता मुझसे कई बार पूछ चुकी है “आखिर तू अपने ताऊ से इतना क्यों चिढ़ता है ? लेकिन मै क्या बताऊँ उस पैसे के घमंड से भरे हुए बीवी के गुलाम की कहानी, और जब शाम हुई तब मैंने घर में माँ से फोन करके पूछा “वो साला जोरू का गुलाम है , की चला गया,? माँ ने मुझे पहले डांट दिया, फिर बताया की वो चले गए हैं, तब मैंने चैन की सांस ली, और अपने घर गया.

अगले दिन कालेज में अनीता को मैंने बताया की राज टॉकीज़ में नार्निया फिल्म लगी है, चल देखने चलें ? उसने मुंह बनाते हुए कहा “नहीं यार मेरा आज मन नहीं है, मै बोला “अरे हालीवुड की दीवानी आज तुझे क्या हुआ है ? उसने कहा “आज मुझे ज्योति से मिलने का बहुत मन कर रहा है, आज उसका जन्मदिन भी है, मुझे भी उससे मिलने का मन करने लगा, वो हमारे स्कूल की दोस्त है, दसवीं कक्षा तक वो हमारे ही साथ पढी थी उसके बाद से मै भी उससे नहीं मिला था, अनीता उससे मिलती रहती है और मैंने भी कह दिया तो फिर आज ज्योति से मिलने चलें ?

अनीता ने कहा “मगर उसका नया घर तो भिलाई में है, सिरसा गेट के पास ड्रीम सिटी में, तो क्या हुआ मेरी बाइक में निकलते हैं रायपुर से भिलाई है ही कितनी दूर ? लेकिन …. मैंने भी कह दिया लेकिन वेकिन कुछ नहीं, और कालेज से हम लोग ज्योति के घर के लिए निकल पड़े, रास्ता सीधा था, हाइवे से सीधा सिरसा गेट पहुँच कर हम लोग दायें मुड़ गए, एक दूकान पर जाकर उसके लिए गिफ्ट पैक करवाया और चोकलेट भी ले लिया, मै भी खुश हूँ क्योंकि ज्योति बहुत अच्छी लडकी है, स्कूल में वो अक्सर चोकलेट खाते हुए नजर आती थी, आज मै पांच या छह साल बाद उससे मिलूंगा,

उसके घर पहुँचते ही हम लोग घंटी बजाकर गेट के बाहर इन्तेजार करने लगे, दरवाजा ज्योति ने ही खोला, उसे देखकर मै बहुत ही खुश हो गया क्योंकि वो बिलकुल भी नहीं बदली है, उसने अनीता को देखते ही गले लगा लिया, दोनों सहेलियां ऐसे मिली जैसे सदियों बाद मिलीं हो, उसके बाद उसने मुझे घूरते हुए देखा फिर अनीता के कान में हलके से कहा “ये कौन है ?

ये बात सुनते ही मेरा दिमाग खराब हो गया, ज्योति ने मुझे नहीं पहचाना , युवराज अवस्थी को नहीं पहचाना ! मैंने भी अनीता के कुछ कहने से पहले उसे जवाब दे दिया - “ जी मै अनीता को होने वाला …. उसने ये सुनते ही मेरी तरफ हाथ बढ़ा दिया “ओह बहुत बधाई हो आपको, जीजाजी , और वो अनीता से गले मिलने के लिए फिर से झपटी, मगर अनीता चिढ गई और भड़कते हुए बोली “अरे ये युवराज है, नहीं पहचाना , अपना नौटंकी बाज़ केंद्रीय विद्यालय में साथ में पढता था हमारे . दो मिनट दिमाग में जोर देने के बाद उसे याद आ ही गया मुझ गरीब की पहचान . फिर वो जोर से हंसने लगी “तू भी न गरीबों के युवराज सुधरेगा नहीं .

हम लोग अन्दर पहुंचे, उसकी माँ और बहन से मिले, और यहाँ हमारा विशेष स्वागत किया गया, अब ज्योति मुझे पहचान गई है, उसे तो मेरी नौटंकियां भी याद है, कुछ देर के बाद ज्योति ने बताया की उसकी शादी तय हो चुकी है, उसके बाद लड़के की फोटो दिखाई गई, साथ ही हमें पहले से आने के लिए भी उसने कहा, इसके बाद दोपहर के खाने के बाद हम लोग देर तक बातें करते रहे, पुराने स्कूल के दिनों को याद कर रहे थे, कितना कुछ बदल गया है लोगों के बात करने के ढंग से लेकर कुछ बंदिशों को मानने तक, , मगर मुझे तो ऐसा लगता ही नहीं, मै आज भी वही स्कूल का मस्त मगन बच्चा हूँ.

इसके बाद हम लोग घर लौट आये, कुछ दिनों बाद ज्योति का भाई अनीता के घर पहुंचा उसकी शादी का कार्ड लेकर, साथ में मेरा कार्ड भी वहीं छोड़ दिया, और ये बताते हुए वह गया की शादी विशाखापट्नम में होगी, तो पहले से बता देना अपने आने के बारे में ताकि हम लोग उस हिसाब से ट्रेन की रिजर्वेशन कराएंगे.

जैसे ही मुझे इसके बारे में पता चला मै तो खुश हो गया की चलो विशाखापट्नम घुमने मिलेगा. और अनीता भी जाने को तैयार थी, इसलिए इस बार बिना किसी झिझक के उसे घर से मंजूरी मिल गई थी, शादी के दो दिन पहले की टिकट बुक हो चुकी है, ज्योति के भाई ने अनीता को फोन करके पहले से ही बता दिया था की आप लोगों की दो टिकट अनीता और युवराज के नाम से बुक हो चुकी है, तय समय पर आप लोग रायपुर स्टेशन पहुंचा जाना, और हम भी तैयार थे.
मगर लड़कियों के हिसाब से चलोगे तो बहुत कुछ झेलना पड़ सकता है ये मुझे उसी दिन मालूम चला, मै अनीता के घर तीन घंटे पहले ही पहुँच गया, और वहां क्या देखा - अनीता मैडम अभी तक बालों में मेहंदी लगाकर अपनी माँ के सर पर वही गोबर लगा रही है, मेरे चिल्लाने पर उसने जवाब दिया की शांत युवराज शांत. ट्रेन कभी भी टाइम पर नहीं आती, तो आराम से बैठो और ठंडा पियो. फिर मैंने उसके नहाने से लेकर तैयार होकर कपडे पैक करते देखे, इस बीच मैंने अपने भिखारी दोस्त मनोज को पहले से ही फोन करके शक्तिवर्धक पेय लेकर स्टेशन पहुँचने को कह दिया था, क्या पता अनीता मैडम के चलते हम स्टेशन सही समय पर पहुंचे की नहीं.
और वही हुआ जिसका डर था, हमने मनोज से कोल्ड ड्रिंक और सोमरस से भरा बोतल और अन्य सामान स्टेशन के बाहर ही ले लिया और जब स्टेशन के अन्दर पहुंचे तो देखा हमारी ट्रेन छूट रही थी, हम दोनों अपना अपना बैग लटकाए हुए ट्रेन पकड़ने के लिए दौड़े. ट्रेन रफ़्तार पकड़ चुकी थी, और उसे पकड़ना मुश्किल था, भला हो ज्योति के बड़े भैया रमेश का उसने हमें देखकर चेन पुलिंग कर दी और हम ट्रेन में चढ़ पाए. इसके बाद ट्रेन के अन्दर पहुंचकर ही हम दोनों ने चैन की सांस ली.
ट्रेन के अन्दर पहुंचकर अनीता को डांटने का कोई फायदा नहीं हुआ, क्योंकि बाकी लोगों ने उसका बचाव किया “कोई बात नहीं बेटा ऐसा तो होते ही रहता है. मै भी चुप हो गया . इस ट्रेन में रायपुर से शादी में शामिल होने के लिए कुछ और लोग भी जा रहे हैं साथ ही रमेश भाई और उनके परिवार के कुछ लोग हैं, हमारी सीट थोड़ी सी दूरी पर है, जिससे मैंने चैन की सांस ली, और वैसे भी कोई भी हमारे पहचान का नहीं था, सिवाए रमेश भैया के, हम लोगों को चाय और नाश्ता के लिए ही वहां जाना पड़ा, फिर हम लोग वापस अपनी सीट पर बैठ गए, रात होने पर ऊपर की सीट पर बैठ हम दोनों ने सोमरस का पान किया, फिर बुलाये जाने पर खाना खाकर वापस अपनी सीट पर बैठ गए, फिर बाथरूम में जाकर सिगरेट पिया और अब अनीता और मै आराम से खिड़की के पास बैठे है,
अनीता आज फिर से पूछने लगी “अरे यार अब तो बताओ तुम अपने ताऊ जी से इतना क्यों चिढ़ते हो ? अब तो मै पी चुका हूँ और सच बोलने का बहुत जोर से मन हो रहा था सो मैंने कहा ठीक है बताता हूँ.
“मेरे ताऊ जी परिवार में सबसे ज्यादा अमीर हैं, फिर भी कोई उन्हें पसंद नहीं करता, क्योंकि परिवार के लोगों से उन्हें बात करने का मन नहीं करता, वो सिर्फ अपने ससुराल वालों और अपने पड़ोसियों को ही इंसान मानते हैं, गूंगे इंसान हैं एकदम, यहाँ तक की उनकी फेक्ट्री में भी सारे निर्णय ताई जी ही लेती है, अरे मै तो बताना भूल ही गया, सिलतरा में उनके दो कारखाने हैं, स्टील जॉब्स एंड वायर्स लिमिटेड नाम से. पैसे की कोई कमी नहीं है, लेकिन जैसे ही मै या कोई और परिवार का बेरोजगार या पढ़ा लिखा लड़का उनके घर जाता है हमारे ताऊ जी के मुंह में जबान आ जाती है,

वो अपनी दुखभरी कहानी सुनाने लग जाते हैं, जैसे “क्या बताऊँ बेटा अभी गुजरात से शिपिंग यार्ड जाकर पुराने जहाज़ों की स्टील और पार्ट्स लेने गया था न उसके चालीस लाख रूपये बाकी है, और बैंक वालों का भी बहुत कर्जा है उसे भी चुकाना है, मेरे कम्पनी में तो अभी हम लोग छंटनी कर रहे हैं, पिछले हफ्ते ही आठ वेल्डर लोगों को निकाला, अनीता उसे टोकते हुए बोली “ये क्या बात हुई कौन सुनाता है ऐसी बातें? वो भी अपने भतीजे को ?
“यही तो उनका तेज़ दिमाग है रे. उन्हें डर है की कहीं मै उनसे कभी पैसा न मांग लूँ या कोई जॉब दिलाने के लिए परिवार का कोई आदमी उनसे बोल न दे इसलिए पहले से ही वो नौटंकी शुरू कर देते है,

अनीता - तो छोड़ों न ऐसे आदमी को, तुम्हारे घर में किसी चीज़ की कमी है क्या ?
युवराज - अरे कोई कमी नहीं है, और अगर होती भी न तब भी मै उसके सामने हाथ नहीं फैलाता. मगर बात इतनी सी नहीं है, उसकी बीवी एक नंबर की अनपढ़ गंवार है, लेकिन अपने पति के साथ कई साल विदेश में रहकर अंग्रेजन बन गई, परिवार का हर मामला वही निपटाती है, ताऊ जी उस समय गूंगे बन जाते हैं, यहाँ तक की किसी की हिम्मत तक नहीं होती उनसे लड़ने के लिए, क्योंकि वो किसी काली माता से कम नहीं. ऊपर से जब हम लोगों की जमीन बिकी तब भी उसने अपना खोपड़ी लगाकर आधे से ज्यादा पैसा अन्दर कर लिया .
अनीता - वो कैसे ?
युवराज - हमारी कुछ जमीन थी पुराने गाँव में, जिसको ताई जी के कहने पर ताऊ ने बेच दिया, फिर कायदे से उस जमीन के बिकने के बाद रकम के दो हिस्से होने थे, एक ताऊ जी का और एक हमारा . मगर ताई ने उसके तीन हिस्से करवाए, एक-एक हिस्सा दोनों भाई का और तीसरा दादी के नाम पर,
अनीता - ये तो अच्छी बात है, न .
युवराज - काहे का अच्छी बात ? दादी का स्वर्गवास हुए चार साल हो चुके हैं, और उन्होंने दादी के नाम का हिस्सा अपने पास रख लिया, ये कहते हुए की दादी हमारे यहाँ रहती थी, मेरा माथा सरक गया इस बात पे, और मै उनसे लड़ने चला गया , की सारी ज़िंदगी दादा और दादी हमारे घर में रहे, मगर दादी ने अंतिम दो साल उनके घर में बिताये इसलिए . मैंने उन लोगों को खूब सुनाया मगर मेरे पिताजी ने मुझ रोक दिया और परिवार में किसी ने भी उन्हें गलत नहीं कहा, दादी के नाम से वो लोग पैसा खा गए,
उपर से वो लोग अभी तीसरी फेक्ट्री और खोलने वाले हैं, फिर भी पैसे का भूख ख़तम नहीं होता इन लोगों का, परिवार में सभी लोग इनके सामने हाथ जोड़कर खड़े हो जाते हैं, मुंह पे कुछ नहीं बोल पाते, और इनके जाते ही चुगली करने लग जाते है, मतलब सब जानते हैं की ये लोग गलत हैं, मगर किसी की हिम्मत नहीं जो मेरे ताई के सामने मुंह खोले.
अनीता - और तुम्हारे ताऊ के बेटे ?
युवराज - एक बेटा और एक बेटी हैं, कहने को तो मेरे भाई बहन हैं, मगर कभी भी उन लोगों ने गलती से भी मुझे याद नहीं किया, बचपन में जब उनके घर जाते थे तो दोनों भाई बहन किसी मेहमान के आने पर अपने कमरे में चले जाते थे, पढ़ाई कर रहे हैं कहके, कभी भी किसी परिवार वाले से न तो मिलने में दिलचस्पी दिखाई न ही किसी से पहले से बात किया, मै अक्सर दूसरों के परिवार वालों को देखता हूँ , कितना मस्त मिलजुल कर भाई बहन लोग साथ में मस्ती करते हैं, अरे तुम्हारे चाचा के बच्चों को देखलो और तुम्हारे ताऊ जी के बच्चों को, जब भी मिलते हो कितनी मस्ती करते हो, मै भी तुम्हारे परिवार के सरे बच्चों के साथ कितना प्यार से रहता हूँ, मगर एक मेरा परिवार है, कहने को तो सगे हैं मगर आज तक वो अहसास नहीं मिला. और मेरे ही भाई बहनों को परिवार के दुसरे लोगों के साथ घूमते हुए मौज मस्ती करते हुए देखता हूँ तो मेरा मन व्यथित हो जाता है, इसीलिए तो मै उनके परिवार के किसी भी सदस्य का फोन नंबर भी नहीं रखता अपने मोबाइल में, और मेरी ताई इन सब की रिंग मास्टर है, प्यार का ऐसा दिखावा करेगी की आप रो पड़ोगे, मैंने अपने जीवन में उनसे बड़ा एक्टर नहीं देखा. ऊपर से मेरा ताऊ अपने पड़ोस के बच्चे को चाकलेट खिलाने ले जाता है, खूब प्यार करता है, और मै उनके सगे भाई का लड़का, आज तक उसने मेरे को एक रुपया तक नहीं दिया. अब समझी क्यों मेरे ताऊ जी से मै चिढ़ता हूँ.
अनीता ने बड़ी आँख के साथ कहा “अरे बाप रे क्या चिरकुट ताऊ है तेरा, मेरा ताऊ ऐसा होता न तो मै उससे बात करना तो दूर उसे देखती तक नहीं, चल कोई बात नहीं, सबकी किस्मत मेरे जैसे थोड़ी न होती है, युवराज उठते हुए बोला “अच्छा” चल मै बाथरूम से आता हूँ, तू रुक यहीं पे, अनीता ने कहा मै भी जाउंगी, युबराज ने माथा पकड़ते हुए कहा “सिगरेट पीने नहीं जा रहा हूँ मेरी माँ . जोर से लगी है, वो तो अकेले करने दे ? “अरे यार तो जा न किसने रोका है ? अनीता ने चुटकी ली .
वापस लौटकर वह अपनी बर्थ पर लेट गया, अनीता भी उसके बगल वाली बर्थ पर सो गई, अगली सुबह स्टेशन से निकलकर सारे लोगों को कार से उस होटल ले आये जहां शादी होने वाली है, और आज से ही ज्योति की शादी शुरू है, विशाखापट्नम में एक तीन सितारा होटल में उसकी शादी हो रही है, यहाँ पहुंचकर पता चला की दूल्हा बहुत रईस घर से है उसका कपडे का कारोबार विदेश तक फैला हुआ है. हम लोग पहुँचते ही ज्योति और उसके परिवार वालों से मिले, इसके बाद हम दोनों अपने अपने कमरे मे चले गए, नहा धोकर तैयार होकर हम लोगों ने नाश्ता किया और दिन भर शादी के रस्मों में व्यस्त रहे, खूब मजा आ रहा था, आज मेहंदी और संगीत एक साथ है, शाम तक जब हम दोनों बोर हो गए तब अनीता और मै वहां से खिसक गए,
समुन्दर किनारे पहुंचकर सबसे पहले हमने बीयर पी, उसके बाद हम दोनों देर तक समुद्र किनारे ही घुमते रहे, यहाँ पर्यटकों की कोई कमी नहीं, बहुत ही साफ़ सुथरा किनारा, साथ ही यह शहर अपने श्रेष्ठ विद्यालयों और अस्पतालों के लिए पूरे देश में प्रसिद्द है, एक विदेशी पर्यटक ने मुझे रोका और उसने अपने दोस्तों की तस्वीर खीचने को पूछा तो अनीता हंसने लगी “अरे आपने कैसे जाना की ये फोटोग्राफर ही है , उन लोगों को यह मजाक समझ नहीं आया, उलटे वो लोग सच में मुझे फोटोग्राफर समझने लगे, और मै उसे घूर कर देखने लगा, फिर हम दोनों ने भी उनके ग्रुप के साथ सेल्फी ली और फेसबुक में पोस्ट कर दिया,

फिर उन्ही विदेशी पर्यटकों के साथ अंगरेजी में बात करते हुए हम लोग समुन्दर किनारे बने बार में गए और एक-एक बीयर उनकी तरफ से पी, वैसे ये अंग्रेज लोग बहुत कंजूस होते हैं, पता नहीं आज कैसे उनके अन्दर राजा हरिश्चंद्र बनने की इक्षा पैदा हो गयी, हमने उन्हें बताया की हम दोनों मेडिकल स्टूडेंट हैं और इसी देश में पढ़ाई करते हैं तब उन्होंने बताया की हम लोग भी भारत में ही पढ़ाई करने के इरादे से आये हैं, शायद बहुत से भारतीय लोगों को यह नहीं पता है की भारत की शिक्षा और डिग्री की विदेश में बहुत ही कदर है, आश्चर्यजनक परन्तु ये सत्य है. चलो कम से कम वहां तो हमारे डिग्रियों की वेल्यु है. मेरे साथ लड़की है इसलिए ये साले अंग्रेज इतना बात कर रहे हैं नहीं तो अगर मै अकेले होता तो ये लोग कोई बात ही नहीं करते.
यहाँ हम कुछ देर और समुद्र किनारे टहलते रहे, और साढ़े नौ बजे वापस होटल चले गए, वहां पहुंचकर खाना खाया और देर रात तक मस्ती चलती रही, रात में अनीता को मैंने कहा “ये शहर बहुत बढ़िया है, क्यों न हम कालेज के बाद इसी शहर में आकर मेडिकल की प्रक्टिस करें ? अनीता ने भी इस बारे में सोचने का फैसला किया, अगली सुबह हम लोग जल्दी उठ गए, और शादी की तैयारी में ध्यान देने लगे, सारा काम होटल वालों को दे दिया गया था बस हम लोग व्यवस्था का हाल देख रहे थे,

शाम को बरात आई, उनकी खातिरदारी में कोई कमी नहीं हुई, मै भी सूट पहने पगड़ी पहनकर बिलकुल लड़की वाला लग रहा था, अनीता ने आज गुलाबी रंग की ज़रीदार साड़ी पहनी है, वो भी मेरे साथ खड़ी है, आज तो वो बिलकुल किसी दुल्हन की तरह लग रही है, हम लोगों ने यहाँ खूब मस्ती की, और खूब धूम धाम से ज्योति का विवाह संपन्न हुआ.

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